Showing posts with label Identity. Show all posts
Showing posts with label Identity. Show all posts

Monday, June 03, 2013

VISITING CARD




एक अनजानी व अनचिन्ही सी मंजिल
बस मन में एक जुनून
और अनवरत
यथास्थिति से बाहर निकलने की कसमसाहट
साथ ही पांवों की ताकत को मापने की इच्छा,
कब से मन भी तो कह रहा था कि
नहीं यह तेरी मंजिल तो नहीं
महज् इसी हौसले की बिना पर
ढुंढना है मुझे एक नया क्षितिज
राह व दिशा से भले ही अनभिज्ञ
मुझे तलाशनी है
मेरे इस Visiting Card के बाहर की दुनिया
इस उम्मीद में कि
शायद वहां मेरी शख्सियत
किसी अवलम्ब की मोहताज न हो।

इस क्षाणिक मैं कौन हूं से
स्थायी मैं क्या हूं की पहचान का सफर
सफर के आदि व अन्त यथा शून्य से अनन्त
एक यथेष्ट Centripetal Force की आवश्यकता
जो पर्याप्त हो कौन या Visiting Card 
के गुरुत्वाकर्षण शक्ति को भेदने में
प्रयास रत हूं इसी उर्जा के संग्रहण में  
ऐसी उर्जा जो प्रक्षेपण कर फेंक दे
कौन के वातानुकुलित कक्ष से
मुझे क्या के व्यापक व्योम में।
   



Sunday, March 22, 2009

Mirror

जब कभी आईना देखता हूँ
सिहर उठता हूँ
हर बार एक नया चेहरा
हर बार आईना
एक बिना धार के चाकु से
मेरे व्यक्तित्व का
कुछ न कुछ अंश
तराश ही देता है।
और फिर मुझे
इस क्षीण होते
व्यक्तित्व की विभीषिका
से भय लगता है।
कभी कभी प्रतीत होता है
कि सम्भवतः अगली बार
जब आईना देखूं
तो उसमें,
मेरा लुप्तप्रायः व्यक्तित्व
शायद नजर ही न आए।
अब अब इस सम्भावना से निजात हेतू
मैने हाल के
अपने बिखरे छितरे चेहरे को
समेट कर
उसकी एक तस्वीर बनवा ली है
समय कहीं बदरंग न कर दे,
इसीलिये इस तस्वीर को शीशे में मढ़ दिया है।
अब आईने में न सही
आईने के बाहर तो
कम से कम कहीं तो बचा रहेगा मेरा व्यक्तित्व
जिसे मैं खुद भी निहार पाउंगा
और परीचितों के समकक्ष भी
चाहे निष्प्राण ही
प्रस्तुत कर पाउंगा।
कहीं तो, इसी तरह बाकी रह जायेगा
ये मेरा चेहरा।
Malignant Mesothelioma
Malignant Mesothelioma