Monday, April 07, 2014
Democracy and Elections
Friday, April 05, 2013
Too Much of Democracy or Too Little of It
Whenever I have traveled to China, it has never ceased to amaze me. These cities in China at least, are as modern as that of any developed country in the emancipated West.
China used to be much below India in all indices in 1949, the year of their Independence.
It had more or less the same problems, only in bigger magnitude, as that were ailing India then. Large burgeoning population, no structural edifice for either Law and Order or Health or Education. Infrastructure too was no better than India.
Today China is already World’s SECOND Largest economy. What is the raison d’être of the distinction between the Status of India and China? Has it been aptly explained by Mr. Mahathir of Indonesia’s this statement, “India has too much of Democracy”.
How a Nation has too much of Democracy? Does India really has too much of Democracy? First query puzzles me and the second query prods me to say ”Too much of Democracy” can never be the fault line for the ills of mine or any one’s जननी जन्मभुमिश्च.
Then The answer was once again visible in the sound bytes of the shrieking TV News anchors. The Captains of Indian Industry were listening to School Boyish essay/speech recited by the Heir Apparent in the manner of participating in an elocution contest. Nearly all the senior functionaries were singing paeans in RG’s honour. The National President of CII, Mr Adi Godrej categorized the speech as Inspiring. Certain another equal big wig called it Visionary and Clear headed.
I though a diminutive Industrialist has been privy and participant in the deliberations that precede these Invitations to the Poltical Big Wigs. It is well understood that the sole reason behind inviting them is to pamper their ego, a mean to keep them in Good Humour. Nothing else but Networking in plain terms. Mr Tarun Das a mere paid minion of CII courtesy these “Role Playing” was able to build enough clout to participate in the “King Making” game. What these Political Mafiaso say in their speeches is of no significance to any of the Doyens or Billionaires sitting in the hall. None of the Industrialist have made their BILLIONS courtesy the policies of the state. They make money courtesy the HUGE discriminatory power lying in the hands of BIG and Powerful political masters who implement the policies. All policies and rules are merely a façade meant to goad the plebeians. To actually benefit from the system, one must be “Networked”.
The problem or the raison d’être of the said DISTINCTION between India and China is not the Democracy, but the CORRUPTION. The corruption not only of the fiscal nature but of the Intent and attitude. RG specifies the raison d’être of inadequate growth as that of “exclusion of certain segment of society” read Muslims. His intent of words/speech is not to interact with the Captains of the Industry and deliberate, but merely to use a photo opportunity for playing the number game. Here too though speaking amongst the Captains of Industry he talks mumbo jumbo about secularism in other words is trying to castigate BJP and garner secular (sic) Votes. To a politician in India all photo opportunities have one singular purpose, “Garner Votes”. Elections that actually are means to serve democracy, have become the End themselves.
This blinkered vision is not the prerogative of Politicians alone. More or less It has become the cause célèbre for the entire society and is the actual raison d’être of the ills of my जननी
No “too much of democracy” is not to be blamed for this morass. The GANGOTRI Or the Fountain Head is the Political College of India. The money to be made by landing a toe hold in the said “Band wagon” is mind boggling. People landing a seat in this college earn in TEN digits (at least) and that too in Dollar or Euro terms (the accepted currency in swiss banks).
Actually it is the lack of democracy that is the true raison d’être. Common man’s voice is of no significance. He is merely a number and the significance of his existence ends the moment he gets his finger Inked in the poling booth. Thereafter the Neera Raadia, A Rajas and RG’s take over. The individual though like a pixel in the 1080X640 resolution, has little role in the picture that emerges out of the Idiot Box. Pixels are programmed/choreographed by the Ekata Kapoor’s of the system. The picture visible is neither of the pixel, nor by the pixel, nor for the pixel.
It is the too little of democracy that’s the Bane of India and not too much of democracy
Friday, September 24, 2010
Home Minister and Rahukal
आजकाल हमारे गृहमन्त्री जी का राहुकाल चल रहा है। और सिर्फ राहुकाल ही नही शनि दशा का भी प्रभाव है। इसीलिये बौखलाहट में रस्सी को सांप समझते हैं और असली सांपों से मारे डर के मुंह छिपाते घूम रहें हैं। आतंकवाद में शेष दुनिया को जर्द होती हुयी इन्सानियत का सफेद रंग दिखता है, इन्हें भगवा रंग दिखता है।
अब राहुकाल को दूर करने के लिये कुछ उपाय करने भी आवश्यक लग रहे थे। नींद में भी बुरे बुरे सपने आ रहे थे। कभी काश्मीर कभी माओवाद व कभी 24 सितम्बर को आने वाला अयोध्या मन्दिर मस्जिद मुकदमे का फैसला। आधी रात को पसीने से नहाये हुये उठते और अपने ग्रहों को कोसते। पहले जहां क से कुर्सी दिखती थी अब क से काश्मीर दिखने लग गया था। पहले ह से हार्वार्ड समझते थे अब ससुरी ह से अपनी ही हारी हुयी शक्ल दिख रही थी।
मरता क्या न करता चले किसी खेवनहार की तलाश में। एक नये बाबा चुनावी कुम्भ में नये नये उतरे थे । नाम राहुल बाबा । बहुतों की नैया पार लगाई थी। आजकल इनके दिये मन्त्रों की बड़ी चर्चा थी। पहुंचे उनके द्वारे कुण्डी खड़खड़ाई। पता लगा बाबा अपनी ही किसी स्पेनिश समस्या के समाधान हेतु अमेरिका गये हुये हैं। खैर मन्त्री जी ने सोचा कि इस कुटिया में तो मिट्टी में ही मन्त्र बसते हैं। बाबा का कोई छोटा मोटा चेला हो तो भी कुछ न कुछ तो बता ही देगा। इस कुटिया में रहने वालों ने कभी किसी विद्यालय या महाविद्यालय की दहलीज तो लांघी नहीं थी। निराली कुटिया है। इस कुटिया में बस जन्म लेने की या कुछ समय भर रह लेने से सारे मन्त्र,उपचार स्वय ही आ जाते हैं। बड़े बड़े पढ़े लिखे सरदार यहां शीश नवाते हैं।
तो मन्त्री जी ने वहां उपस्थित माली से ही पूछ लिया। भैये तुमे इस परिवार के साथ विगत 40 वर्षों से हो।राहुल बाबा भी 40 के ही है। इस घर की छाया तुम दोनो को बराबर ही मिली है। अब तुम ही कोई मन्त्र सुझा दो। माली ने आनन फानन में गृह मन्त्री जी को भगवा आतंकवाद का मन्त्र दिया। कहा जब तक राहुल बाबा अमेरिका से वापस नहीं आजाते तब तक इसी मन्त्र से काम चला लीजिये। । श्री चिदाम्बरम जी ने तुरन्त मीडिया को बुला भगवा आतंकवाद के मन्त्र का जाप शुरु कर दिया। इस मन्त्र के सहारे कुछ दिन नींद भी आ गयी।
राहुल बाबा के आते ही पहुंच गये गृह मन्त्री जी बाबा के दरबार में। पहुंचे तो पाया कि राहुल बाबा अपनी मां के सामने “मैं तो वही SPANISH खिलोना लूंगा” के अन्दाज में बिफरे हुये नजर आये। मन्त्री जी समय का तकाजा समझ अपनी उपस्थिति नही जता बाहर खड़े रहे। अन्दर भारत की सबसे विषम राष्ट्रीय समस्या पर चर्चा हो रही थी। राहुल बाबा के नहीं हो रहे विवाह की। माताश्री राहुल बाबा को समझा रही थी । कि उनके विदेशी मूल के होने की वजह उनके प्रधान मन्त्री बनने में बाधा बनी। अब अगर राहुल बाबा भी अगर एक विदेशी SPANISH सुन्दरी से विवाह कर लेते हैं तो उसके एवज में उन्हें सत्ता सुन्दरी से निश्चित ही हाथ धोना पड़ेगा। उदाहरण से समझा रही थी। राहुल बाबा तुम तुम्हारे पिता के देहान्त के समय इक्कीस के थे। सन 2003 में जब तुम राजनीति में उतरे 33 के थे।ये बीच के बारह वर्ष बेरोजगार हो एम्प्लायमेन्ट एक्सचेंज के चक्कर काट रहे थे। अब जब अपने पारिवारिक व्यवसाय में Board of Directors में जगह मिल ही चुकी है फिर सिर्फ और सिर्फ अपने पारिवारिक व्यवसाय को सर्वोपरि मानो। शेष मुद्दों को गौण।
खैर चिदाम्बरम जी ने भी खांसते हुये कुटिया में प्रवेश किया। राहुल बाबा की माताश्री की भारतीय सरकार में वही स्थिति है जो महाभारत में श्री कृष्ण की थी। यानि धर्म संस्थापनाय संम्भवामि युगे युगे। चिदाम्बर ने मादाम से अपने राहु काल से निकालने का कोई उपाय सुझाने की प्रार्थना की। फिर अपने हाथ भी बंधे होने की गुहार लगाई। इस इतनी बड़ी विपदा से बंधे हांथों से किसे निबटा जा सकता है मदाम कृपया आप ही कोई रास्ता बतायें। मादाम से निवेदन किया कि राहुल बाबा तो साक्षात् अश्वमेघ यज्ञ के अश्व सम हैं। इन्हें काश्मीर भेज दीजिये। हुरियत तुरन्त इनकी मिलकियत स्वीकार कर लेगा।
मादाम ने गृहमन्त्री जी से कहा कि अश्वमेघ यज्ञ तो शायद यहां नहीं चले। अगर हुरियत वालों ने राहुल रुपी अश्व को ही बांध लिया तो परीस्थिति सांप नेवले की हो जायेगी। अन्य कोई उपाय बतायें राहु काल से निपटने का। अब मादाम आप ही तो भारत में एक मात्र श्री कृष्ण हैं तो गीता का पाठ तो आपको ही पढ़ाना पड़ेगा।
मादाम: भई सच्चर कमिटी के सन्दर्भ में अल्पसंख्यकों को कुछ विशेष अधिकार तो हमें देने ही होंगे। उन्हें तो बम व ए के 47 तक चलाने के अधिकार दे देने चाहिये । अब बम एवं ए के 47 से अगर वे पत्थरों पर आ गये हैं तो सुरक्षा बलों को कहिये कि चुप चाप पत्थरों की बौछार सह लें। आई एस आई इन पत्थरबाजों को 300 रुपये दिहाड़ी दे रही है,आप सैन्य बलों को पत्थर खाने की 400 रुपये की दिहाड़ी दे दीजिये। और हां सैन्य बल के लिये पत्थर खरीदने की निविदा क्वात्रौच्चि को दिलवा दें।
तभी उनके सुरक्षा सलाहकार श्री शिव शंकर मेनन जी भी वहां पहुंच गये। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बल पत्थरों की बौछार सहने के लिये प्रस्तुत न्हीं है, तो अब और कोई जुगत भिड़ानी होगी। मादाम ने चेतावनी स्वरुप फरमाया कि ,खबरदार आप चिदाम्बरम जी के हाथ खोलने के अलावा ही और कोई सलाह दें अन्यथा हमें और कोई नया सलाहकार तलाशना होगा।
राहुल बाबा ने अपनी जुबान खोली। देखिये सारी समस्या पत्थरों की बौछार की है।तो ऐसा कीजिये कि घाटी में एक भी पत्थर नही मिले। तो क्या उठायेंगे और क्या फेंकेंगे। मादाम ने बड़े गर्व से अपने बेटे को निहारा। कहा देखिये बिना हाथ खुलवाये ही अपको आपकी समस्या का निदान मिल गया।
मेनन जी ने मादाम जी की ओर मुखातिब होते हुये उन्हें भारत के मनचित्र से वाकिफ करवाते हुये उसमें काश्मीर दिखाया। कहा मादाम वहां तो पूरी हिमालय पर्वत की श्रींंखला है। पत्थर खत्म करने के लिये तो पूरा हिमालय ही साफ करना पड़ेगा। अब यह काम न तो राज्य सरकार के बूते का है न केन्द्र स्रकार के बूते का।
राहुल बाबा ताजा ताजा ओड़िशा दर्शन कर लौटे थे। वहां से अर्जित अनुभव के आधार पर उन्होंने अपना सुझाव दिया। क्यों न हम हिमालय पर खनन करने का अधिकार वेदान्त उद्योग के अध्यक्ष श्री अनिल अग्रवाल को दे दें। कुछ न कुछ पार्टी फंड में धन भी आजायेगा। और उसमें हिमालय को साफ कर देने की क्षमता भी है। न हिमालय रहेगा न पत्थर तो यह समस्या आराम से सुलझ जायेगी।
या फिर इसके अलावा तो बस एक ही उपाय है कि श्री चिदाम्बरम जी एक विशाल हवन का आयोजन करें। समिधा में भारत का स्वाभिमान फूंक हुरियत के देवताओं को प्रसन्न करें। ऊं स्वाभिमान स्वाहा, ऊं सैन्य सुरक्षा बल स्वाहा, ऊं पांच लाख शरणार्थी हिन्दु स्वाहा, ऊं संविधान स्वाहा, से शायद काश्मीर के नव ग्रह शान्त हो जायेंगे।
मेनन जी फूटे, लेकिन अन्य समस्याओं यथा माओवाद,मन्दिर मस्जिद का क्या निदान है मादाम्। गृहान्त्री जी के हाथ तो यहां भी बन्धे हुये हैं। मादाम ने झुंझलाते हुये फरमाया कि मैं सोचती हूं कि मैं मेनन जी के स्थान पर अरुन्ध्ती राय को भारत का सुरक्षा सलाहकार नियुक्त कर देती हूं। राहुल भी तो वहीं से सीख कर आपको सुझाव दे रहा है। उनके पास ऐसी सारी समस्याओं का शर्तिया सुझाव रहता है।
अब चिदाम्बरम जी को महसूस हो रहा था कि शायद हवन का सुझाव ही आज की परिस्थिति में सर्वोत्तम रहेगा। निकल पड़े समिधा इकट्ठा करने हेतू। ऊं गणतन्त्र स्वाहा। ऊं अखण्डता स्वाहा।
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Monday, July 20, 2009
Rakhi Savant and Rahul Gandhi
आजतक हमने तो दो ही स्वयंवर का उल्लेख सुना था।एक जिसमें शिवजी का धनुष तोड़ा गया था एवं दूसरा जिसमें मछली की आंख फोड़ी गयी थी। इस कलियुग में पहली बार तीसरे स्वयम्वर की चर्चा सुनी। राखी भौजी का स्वयम्वर।अब आप कहेंगे कि भौजी के स्वयंवर का क्या अर्थ है ? अरे भई जो भी धनुष तोड़ लेगा कोई न कोई “भाई” ही होगा। तो फिर इन्डिया में हो या न हो हमारे भारत में तो भावी भौजी को भी भौजी कहने का रिवाज है।
तो जनाब हम भी पंहुच गये राखी सावन्त का स्वयंवर देखने। इच्छा तो participate करने की ही थी। लेकिन कुंवारा होना उम्मीदवारी की अनिवार्य शर्त थी। अब भैया क्या पता उ स्वयंवर जीते या न जीते ,लेकिन उस की उम्मीदवारी में जो हम जीत चुके थे उसे तो नहीं गंवा सकते थे।
तो हमने पड़ोस के नेताजी को पटा कर दर्शक दीर्घा का पास बनवा ही लिया। अब ये बात और है कि हमारी संसद तक में दर्शक दीर्घा के पास पर भी मण्डप में प्रवेश सकता है , तो यह तो NDTV का स्टुडियो भर था। सोचा अगर मौका मिला तो ठीक वर्ना चलो दूल्हा नहीं तो कम से बाराती बन दावत तो मिल ही जायेगी । फिर गधे और नट की कहानी याद आयी। क्या पता लड़की रस्सी से गिर ही जाये। या फिर एक और भी सम्भावना थी कि जैसे BAYWATCH की Pamela भौजी ने अपनी हनीमून की विडियो राइट्स बेची थी क्या पता सीरीयल के निर्माता TRP के खातिर यहां भी ऐसा कुछ कर दें।तो भैये सम्भावनायें अनन्त थीं।
राखी जी के स्वयंवर की शर्तें बाहर वीडियो पर सुन्दर एनीमेशन के साथ नाच रहीं थी.:
शर्तें::
1) कुंवारा होना
2) जन्म कुण्डली मिलनी चाहिये
3) सार्वजनिक रुप से कभी किसी को किस्स नही किया होना चाहिये
4) कद लम्बा
5) रंग गोरा
6) उम्र : 25 से अधिक
7) तालीम : चेक पर दस्तखत करना आता हो।
8) अगर प्रेम पत्र अच्छे लिख सके तो एक अतिरिक्त योग्यता मानी जायेगी।
9) थप्पड़ खाने का तजुर्बा भी आवश्यक है।
9) सब उम्मीदवरों से उम्मीद की जाती है कि वे अपने बैंक (स्विस) एकाउंट स्टेटमेंट साथ ले कर आयें।
10) शादी की मियाद बैंक (स्विस) स्टेटमेंट के अनुसार तय की जायेगी।
पर्दा उठता है। कोई एक श्रीमान भावी वधु का परिचय करवाते हैं।
ये राखी सावन्त हैं।
इनकी जबान तो बोलती ही है जिस्म उससे अधिक बोलता है।
सबजगह से बोलता है।
इनकी खासियत है कि ये खुद कितना भी नीचें गिरें, बस TRP उपर जानी चाहिये।
लोग इनसे थप्पड़ खाने के लिये भी कतार में खड़े रहते हैं। अब मीका को कोई नहीं जानता था लेकिन एक थप्पड़ ने उसकी तकदीर बदल दी। स्टेज शो एव स्टेज शो के पैसे दोनो मिलने लगे।
अब बगल में एक दिलजले (खट्टे अंगूर वाली लोमड़ी, किस्म के व्यक्ति) बैठे थे। उनसे रह नही गया। फुसफुसाते हुये कान के पास आ कहने लगे ,भाई साहब उस थप्पड़ से मीका की तकदीर तो खुली ही, साथ साथ राखी की तकदीर को भी चार चंद लग गये। इनसे शादी करने के बनिस्बत थप्पड़ खाना अधिक लाभ का सौदा है।
मैंने कहा भाई अभी तक तो मेरा या आपका दोनो(शादी का और थप्पड़ का) का ही कोई चान्स नहीं है। तो फिर दोनों के बीच मोल तोल क्यों किया जाये।
फिर तमाम कुंवारों का परिचय करवाया गया। भारत के सारे WHO’S WHO कुंवारे वहां उपस्थित थे। mahendra siमहेन्द्र सिंह धोनी से लेकर राहुल गान्धी तक।
राखी पहले उम्मीदवार के रुप में राहुल गान्धी से मुखातिब होती हैं।
राखी:: आपके बैंक एकाउंट से तो सारा देश वाकिफ है। स्विस भी और इटालियन भी। और आपकी नाम राशि भी हमारे नाम राशि से मिलती है।जब नाम राशि मिलती है तो कुण्डली भी मिल ही जायेगी। पेशे से आप किसान हैं ऐसा आपने लोकसभा के चुनाव अधिकारियों को बताया है।
भारत में आपसे अधिक अमीर किसान तो और कोई नही, होगा। बाकी अन्य खुबियां भी बताइये।
राहुल G :: अब देखिये तुम्हारी प्रेम पत्र वाली शर्त पर तो हमसे बेहतर कोइ नहीं होगा । हमने अपने प्रेम पत्र से पूरा उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान हिला दिया। तुम अपनी cleavageccleavagecc से तो सिर्फ झुमरी तिलैया ही हिलाती रही हो।
मेरे प्रेम के किस्से कोलम्बिया तक फैले हैं।
T R P के लिये जैसे लटके झटके तुम करती हो।मैं भी करता हूं। कभी किसी गांव में रात बिताता हूं, कभी दिहाड़ी
मजदूरी करता हूं। तुम्हारा भी सारा किरदार TRP पर निर्भर करता है मेरा भी। isaइस TRP के बाहर तुम भी और कुछ भी करने में अक्षम हो ,मैं भी। फर्जी युनिवर्सिटी की डिग्री, चुनाव आयोग में दाखिल कर चुनाव तो लड़ा जा सकता है। CORPORATE SECTORमें कोई नौकरी तो नहीं मिल सकती इसकी बिना पर।
बाकी उम्मीदवार जैसे महेन्द्र सिंह धोनी कि क्रिकेट की कोई जागीर तो है नहीं।बकौल गब्बर जब तक इसका बल्ला चलेगा तब तक इसकी TRP चलेगी। क्या पता बैंक एकाउन्ट पहले खत्म हो या TRP। तो फिर क्या मुकाबला है मुझमें और उसमें। यहां तो खानदानी जागीर है। कम से कम चार पुश्तों से तो चल ही रही है।
मिxxन्द वो तो हमारे मुनीम का बेटा है। युवराज के पास तो सिर्फ भारत के टटपुंजिया बैंकों की पासबुक ही है।
और फिर जब हमने एक हाथ से हाथी को पछाड़ दिया तो शिव जी का धनुष तोड़ने में क्या देर लगेगी।
मेरी मानो बाकी सब को दफा करो ।
यह सब सुनने के बाद राखी जी ने भी सीता मैया की जय का उद्घोष लगाया। मुझे तुलसी दास जी की चौपाइयां याद आ रहीं थी “याते सब सुधी भुल गयी।। कर टेक रही, पर टारत नाहीं”। तो भैये अब बिल्कुल राम राज्य आने को ही है। “अब हमारे चारण, विप्र, गण मिलि वेद पढ़ाईं” शुरु कर ही दें।
मध्यान्तर के बाद दूसरे एपिसोड की शूटिंग होनी थी। शूटिंग शुरु हुयी। राहुल भैया ने मंच पर आकर धनुष ढुंढना शुरू किया। राखी ने कहा देखो शायद पलंग के नीचे पड़ा होगा। राहुल ने धनुष निकाला, तो पाया कि वह तो पहले से दो जगह से टूटा हुआ था। राहुल ने कहा कि यह तो पहले से ही टूटा हुआ है। राखी ने झुंझलाते हुये कहा कि देखो मंए कब कहा कि यह मेरा पहला स्वयंवर है। तो। यह तो मेरा तीसरा स्वयंवर है। भइ यह क्या तमाशा है।
राखी: देखो मैं समझाती हूं। पहला स्वयंवर टू व्हीलर आलों में से हुया था। दूसरा फोर व्हीलर वालों में से था। अब आज तीसरी बार मर्सीडिज वालों के साथ स्वयंवर है। अब अधिक नखरा किये बिना एक कोने से तुम भी तोड़ लो।
तुम्हारी TRP भी पांच साल बाद मार खा सकती है। तो देखना कि धनुष में चौथे स्वयंवर के लिये भी प्रावधान बना रहे।
और उधर धोनी भी कह रहे थे कि भइ यहां तो मुख्य शर्त धनुष तोड़ने की थी। हमें भी मौका तो मिलना ही चाहिये।
अन्य लोगों ने सुर में सुर मिलाया। बगावत होने को थी।
राखी भौजी ने बड़ी समझदारी का परिचय देते हुये कहा कि छोड़िये ये सब। हम चारों को ही जीता घोषित कर चारों से ही ब्याह रचा लेते हैं। पिछली बार भी तो पांच पतियों के वरण का इतिहास है ही। अब मेरी बांछें खिल रहीं थीं कि ये तो चार ही हैं। क्या पता मीका नहीं यार मीका नहीं, छींका ,हां हमारे भाग्य का छींका टुट ही जाये।